मांडवी

Posted: November 28, 2012 by Ankur in Hindi Write-ups, Srijan; BITS Pilani GOA, Writes...
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मांडवी, पणजी के साथ साथ बहती, जीवनधारा है, समृद्धी का, आर्थिक सम्पन्नता का आधार है, विशाल है, विख्यात है और अगर ध्यान से देखें तो बला की खूबसूरत है! रात में जब पूरे शहर की रौशनी को खुद में तारों जैसे समेट लेती है, तो आसमान कहाँ, और धरती कहाँ, कोई फर्क नहीं रह जाता। देखा तो कई बार है, पर एक दिन जब टैक्सी में रेडियो पर बजते ‘मैं पल दो पल का शायर हूँ ‘ सुनते हुए उसकी ओर देखा तो उसके आहिस्ता आहिस्ता बहते पानी में बहुत सुकून पाया। हरिद्वार में जब गंगा मैदानों में उतरती है तो उसकी तीव्रता में जो शक्ति होती है वो मन के हर विचार को कुछ देर के लिए हरा देती है, यदि गंगा में प्रभुत्व है तो मांडवी में शीतलता है, घावों को भरने की क्षमता, स्थिरता है।

सहसा ही इच्छा हुई की रुक कर छू लूँ उसे। तट के उस पार पहाड़ हैं, पेड़ हैं, घर हैं, और मंदिर। कुछ पंक्तियाँ होठों तक आती हैं,
‘इस पार प्रिये, मधु है, तुम हो,
उस पार ना जाने क्या होगा’
जो काम पहले ख़त किया करते थे, अब sms के ज़रिये हो जाया करते हैं। सो आज ये छंद और मांडवी की असीम खूबसूरती को शब्दों में कैद कर कुछ अज़ीज़ लोगों को भेजा दिया। इस उम्मीद में की अपनी अपनी ज़िन्दगी की कहानियों में मसरूफ वो लोग जब किसी नदी को देखेंगे, यही गुनगुनायेंगे, कुछ ये छंद, कुछ हम, कुछ ये दिन उन्हें याद आयेंगे। और साथ ही आएगी एक मुस्कराहट।
अगर आप कभी गोवा आयें तो समंदर के अलावा इस बेमिसाल नगीने को देखना न भूलें। शाम को नदी किनारे बैठ सूरज को उस पार डूबने दें, और इस पार अपने मन की सभी कुंठाएं, कभी ग़मों को जाता हुआ महसूस करें। इसकी निरंतरता में अपनी नश्वरता को महसूस करें।
और जब सूरज डूब जाए तो निराश ना हों, क्योंकि अगली सुबह वो फिर यहीं से उगेगा और इस अंतराल में जो मुख़्तसर सियाह रात है वो भी किसी महबूब के आँचल सी रोशन है। बेजोड़ है।
-ऐश्वर्या तिवारी 
in collaboration with Srijan; BITS Pilani, Goa

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