मेरा हमदर्दी

Posted: March 29, 2013 by Ankur in Live Events, Writes...
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“मेमे जीवन मुझे मिला|”

तेरे इस दर्द से, तेरे इस दान से, आज सहारा मुझे मिला|’

क्यो किया गया तेरेसाथ कुछ ऐसा

कि तेरे ही सहारे को छीन लिया गया,

मासूम तू इतना कि “अपना दर्द ना बया करने वाला उन दरिंदो को तू मिला|

क्यो अपनी ही ज़रूरतो को पूरा करने के लिए,

उन दरिंदो ने सिर्फ़ तुझे चुना|

यह ऊन, यह मुलायम सा एहसास, जिसके साये मे,

मैं जी रहा हूँ, यह मुझे तुझसे मिला|

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तेरा मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि, “यह एहसान तेरा मुझे मिला|”

जो एक इंसान ना कर सका, वो आज तूने किया..

मैं खुशनसीब हूँ जो साथ तेरा मुझे मिला|

तुझ से ही मुझे सुकून मिला..

तुझ से ही मुझे आराम मिला..

ए मेरे हमदर्दी..

इस तकदीर का खेल की कुछ अनोखा है

जो तुझे ये दुख और मुझे ये आराम मिला|

“तेरा मैं कर्ज़दार हूँ” जो.

इन कठिनाइयो मे साथ मुझे तेरा मिला|

logoPriyansha Sharma

https://www.facebook.com/priyansha.sharma.10

Creative Writing event @ Panache 2013 by CampusWriting…

(Fifth Place Winning Article)

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