मुझे अब लौट जाना हैं

Posted: June 10, 2013 by Ankur in Hindi Write-ups, Writes...
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मुझे अब लौट जाना हैं,

अचानक टूट जाना हैं,

के मेरे देश से आगे कोई परदेश मेरी मंज़िल हैं,

और मेरे दोस्तों ने हाथ मे सफ़र का दाग भी बढ़ा दिया हैं ॥

 

वो रिश्ता करके कल की बातें भुलाएं जा रही,

जो रिश्ता सम्भालतें  हुऐ जा रहा,

पर वो बातें, जो तेरे हंसीन सा चहरे पें नुमाया थीं,

वो सारे लब्ज़, यू ईस्क के आँखों पर उतरे ॥

 

तेरे खामोश ज़ुबा में छुपें गुमराह के अफ़साने,

तेरे गुफ़्तहार कि रिमझिम, तेरे रफ़तार के मौसम,

तेरे ईकरार कि वो नज़ाकत,

तेरे दिल से ऊबलते खून के पाक नग्मे,

तेरे चहरे के खामों-खद में छुपें आँह ॥

 

तेरे एहसास कि सिद्द्त,

तेरे जज़्बात कि हिम्मत,

में सब कुछ याद रखूँगा,

तेरी खामोश आवाज़े,मेरी जीवन में याद बनके ऊभरेंगी ,

 मुझे अब लौट जाने दे,

अचानक टूट जाने दे ॥

दीप शंकर घोष

KIIT School of Biotechnology

deepsnkr.ghosh@gmail.com

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