जीने की वजह

Posted: March 6, 2014 by Ankur in Hindi Write-ups, Writes...
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…न जाने क्यूँ ये जिंदगी उन चंद ख्वाहिशों की मोहताज है ,
न जाने क्यूँ इन खामोशीयों मे भी आवाज़ है। 
मेरी रूह अब करती एक आवाज़ है ,
हाँ एक रूह की आवाज़ है ,
जो दे रही एक अज़ाब (पीड़ा) है 
एक अज़ाब जो बुन रहा एक ख्वाब,
उस ख्वाब का पंछी हूँ मैं ,
जो हो रहा है उसका साक्षी हूँ मैं ,
ये वही हूँ मैं,
जो उस दर्द का गुनहगार है 
हर उस खुशी का हकदार है ,
जो अब तक उससे जुदा है
जुदा है तब तक ,
जब तक ये ख्वाब पूरा न हो 
जब तक इस पंछी की उड़ान पूरी न हो ।

माना ये दर्द मुझे जीने न देगा 
पर मुझे पूरा विश्वाश है ,
यही मुझे जीने की वजह देगा 
यही मुझे जीने की वजह देगा …

Vishal Maurya

Zakir Husain Delhi College, DU

vishal18995@gmail.com

Comments
  1. ANAJIRS says:

    Reblogged this on ANAJIRS'S ……….. and commented:
    Nice

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