हर किनारा साहिल नही होता …

Posted: March 21, 2014 by Ankur in Hindi Write-ups, Writes...
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Here in this poem ,poet wants to say…

every bank of river can not be ur bank that can buy ur desired dreams ….
you have to work hard to get your final destination……!!

Let see how many of you reach …

कल जब हवाओं ने साथ न दिया ,तो मैंने फिजा से पूछा
ऐ जिंदगी बता तेरी रजा क्या है ??
इस तरह जीने मे मजा क्या है ??
तब जिंदगी ने जवाब दिया —
अगर तू सिर्फ जीने की ख्वाईश रखता है ,
अगर तू हर किनारे को अपना साहिल समझता है ,
समझता है ,प्रतिभा की हर आराइश सिर्फ तुझमे है ,
आ चुका है तू ,हर छितिज के पार ,
लक्ष्य भेद सकता है तेरा हर वार,
तो समझ ले एक मृगतृसना का मोहताज है तू ,
एक गूंगी सी आवाज है तू,
जो न समझ पाया ,उसी से अंजान है तू 
निकाल पड़ा है तू ,एक अनजाने से सफर पर 
एक सफर जिसकी कोई मंजिल नही, 
एक कश्ती जिसका कोई साहिल नही ।

फिर मैंने कहा …..
समझा चुका हूँ मैं अब –
हर किनारा साहिल नही होता ,
अभी प्रतिभा की हर आराइश को पाना है
हर छितिज के पार जाना है 
इस सोने को तप कर कुन्दन बन जाना है 
वैसे भी हर वार कों कहाँ लक्ष्य भेद पाना है ??
वैसे भी हर वार कों कहाँ लक्ष्य भेद पाना है ??

Vishal Maurya

Zakir Husain Delhi College , DU

vishal18995@gmail.com

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