Mn ki aawaj

Posted: April 3, 2014 by Ankur in Hindi Write-ups, Writes...
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ये दुनिया का झमेला ,
अब और सहा नही जाता है ।.
इस दुनिया से मुकिती पाने का मेरा मन अब करता है। 
इस दुनिया से मुकिती पाने का मेरा मन अब करता है । .
जब य़े बात मेरे मन मे आती है ,एक और बिचार आ जाता हैँ ।
मम्मी पापा के सपनो को पंख दीलाने का मेरा मन अब करता है ,
उनकी उमीदो को एक नयी पहचान दीलाने का मन अब करता हैँ , अब और सहा नही जाता है ।
इस दुनिया से मुकिती पाने का मेरा मन अब करता है । अमित कुमार 
बी.बी.डी.कालेज लखनऊ

Amit Kumar

BBDNITM Lucknow

Comments
  1. Ashok Sachde says:

    कलीयुगमे भगवान व्यापक होगया सभी भगवान है यहा “नकलंकी” अवतार है भगवानका “वामन रूपे फरे छे विराट” जैसे भगवदगीतामे भगवानने अपना स्वरुप विराट बताया है। कलीयुग ये ऐसा युग है जीसमे देवी देवताभी तरसते है के हमेभी जन्म मीले कलीयुगमे और वहभी मनुष्य अवतारमें क्योकी बाकी सारे युगमे भगवान अलगसे अवतार लेतेथे तो उन्हे ढुंढने जाना पडताथा पर अब सारे मनुष्योका अवतारही भगवानका अवतार है व्यापक है भगवान सारे विश्वमे और ईसीलिये आखिरी मौका है सभीमे दर्शन करलो भगवानका जैसी भावना ऐसी सिध्धि सुना है न ! नकलंकीका मतलब जबभी भगवानने अवतार लिये तो कोइना कोइ मनुष्य उनमे दोष देखते जबकी भगवानमे कोइ दोश है ही नही जो अगर भगवानमे दोश देखते हो तो जरा देख लेना अपनी नजरोको हजारो दोश मीलेंगे उसमे और यह दोश समाप्त करनेके लिये सारे विश्वमे मनुष्य रुपमे विस्तार कर लिया है अपना भगवानने इसीलिये संत कबीरनेभी एक भजनमे कहा ‘अपना दोश निहारलो बस होगया भजन भगवानका’ मतलबके खुदके दोश देखके भगवानके समीप हो जाना उसकाही आधार लेके अपनेकोही भगवानमे समर्पित करना जीससे साक्षात्कार होजाये सिध्धहो जाये ज्ञान हो जाये भगवानही है ‘मै’ नही व्यापक दर्शन पाले जीससे ‘मै’ मेरा और तु तेरा और भगवान ये सब लुका छुपीका खेलमे ईश्वरकी आज्ञाके बगैर पत्ताभी नही हिलता यह ज्ञात हो जाये और समर्पण होजाये जीवन भगवानके चरणोमे जीससे मोक्ष गतीमे जीवन चला जाये और मनुष्य जीवनका उदेष्यभी पूरा होजाये सभीका अत्मकल्याणहो जीसमे आत्मासे परमात्म तकका सफर तय होजाये जो अनंत है । जै गुरुजी जीसमे गुः याने अंधकार और रुः याने प्रकाश गुरु वह जो इस जीवको अंधकारसे उजालेमे ले आये । सभीमे गुरु दर्शन करनेसे यह सफर जल्दी तय हो जाता है जैसेकी औरतमे देखना जब हमे खाना बनाके देती है तो भुखको शांत करके हमे प्रकाशमे लाती है, बच्चेमेभी ऐसेही देखे और बच्चेके हम गुरु है उसके पिताके रुपमे याने जब जबभी जो हमे अंधकारसे बार निकाले उसे हम मनमे गुरु समझ शकते है जीससे आत्मासे परमात्मा तक सफर तय हो शके गुरुके चरणोमे कोटी कोटी वंदन जो निराकार है और बुध्ध्दिमे ज्ञानके रुपमे प्रघट होते है और अंधकारसे सदैवही बाहर निकालते रहते है। व्यापक सब घट आत्मा जाको आदि ना अंत सो मेरे उर नीत बसे जै जै गुरुभगवंत जाको गावत वेद नीत अकल अखंद अनंत सो मेरो निज आत्मा जै जै गुरुभगवंत गुरुके चरणोमे मेरा जीवन शरणागत हो जाये यही जीवनकी सच्ची प्रार्थना। जै गुरु ॐ।
    भगवानकी लीला है ये अगर कीसी मनुष्यको ज्ञात हो जाये सचमे उसे सत्यका ज्ञान हो जाता है ये लीला बताते है कृष्णकी पर हयाती(ज़िंदगी या जीवन संबंधी; प्राण संबंधी )मे जो है ये सारा संसार हाल अभी याने जो हमारा शरीर और इस शरीरसे जोभी हम कर पा रहे है या कर रहे या कार्य हो रहे है यह सारा कुछ परमात्मकी लीला है यह जीसे ज्ञान होजाता है उसेभी मील जाते है परमात्मा और द्रष्टा बन जाता है इस लीला रूपी संसारका अपने जीवनका पर इसके लीये अभ्यास है एक राम जो हमार मन-वाणी दुसरे राम है श्वास जो धट घट व्यापक है तीसरे राम सर्जनहारा याने शिवम् अस्तु सर्व जगत है और चौथे राम है न्यारे जो सबसे उपर जो अपने श्वास को ले जाके सदाके लीये बैठादे अपने मस्तिकमे जीतेजी जिससे हो जाता है साक्षात अनुभव | Learning by Direct Experience नहीतो यह श्वास इन्सान जब मरजाता है तब तो चार घन्टे उनका श्वास रहता है इस देहमे और भगवान साक्षात मीलनेभी आते है पर जैसे आज जी रहा है मनुष्य वास्तवसे परे अपनी भ्रामक दुनियामे मरनेके समयभी यही हाल रहते है और कहते है परमात्मा सबको सद्बुध्धिदे जबकी परमात्माही है सबकुछ हमारे जीवनका अस्तित्व रूवे रूवे, रोम-रोम में समाया है वही है वास्तविकता हमारा होना यह है सच और बाकी उस जगदीश्वरकी लीला जो हाल आज अभी चल रहा है हमारा आपका सारे विश्वका सच । जै गुरुदेव तुम्हारे चरणोमे कोटी कोटी वंदन गुरुवे जो सिर्फ मतीमे ज्ञानके रूपमेही दर्शन देते है और जो विश्वके सारे शरीरोमे एक है या यु कहे पूरे अखिल ब्रह्मांडमे है एक । व्यापक सब घट आत्मा जाको आदि ना अंत सो मेरे उर नीत बसे जै जै गुरु भगवंत जाको गावत वेद नीत अकल अखंद अनंत सो मेरो नीज अत्मा जै जै गुरु भगवंत ।

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