मेरी पुकार

Posted: May 16, 2013 by Ankur in Contest, Hindi Write-ups, Writes...
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मेरी दिल की पुकार,

तुम सुन ना पाए ,

मेरे इस पागल दिल को,

तुम अपना ना बना पाए॥

कह दिए बड़ी आसानी से,

की भूल जाओ हमे,

लेकिन साँसो की पुकार को,

तुम समझ ना पाए ॥

चल दिए किसी और का हाथ थाम कर,

रह गए हम अकेले, इन तन्हा राहों पर ।

भूल जाने की कोशिश करते रहे,

अपना मन मार कर ॥

लेकिन ये दिल आज भी,

याद करता है तुम्हे थक-हारकर,

मेरे दिल की आवाज,तुम सुन ना पाए,

हम रह गए तन्हा,अकेले इन राहों पर ॥

माना गलतियाँ हुई थी मुझसे,

पर उनको सुधारा भी था मैनै,

इन सब के बावजूद,तुमने ठुकराया क्यूँ मुझे ?

आखिर सजा कुछ यूँ मिली है अब हमें,

अकेले जीने की सजा मिली है अब हमें ॥

Indranil Shukla

KIIT University, Odisha

School of Biotechnology

suklaindranil@gmail.com

https://www.facebook.com/suklaindranil

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